मध्यकालीन भारत में धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समन्वय का अध्ययन
Keywords:
मध्यकालीन भारत, धार्मिक सहिष्णुता, भक्ति आंदोलन, सूफीवाद, सांस्कृतिक सहयोगAbstract
मध्यकालीन भारत (8वीं से 18वीं शताब्दी) धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समन्वय का एक अनोखा युग था। इस शोध पत्र का उद्देश्य इस काल में विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक संयोजन-जाटकों का विश्लेषण करना है। शोध पत्र में भक्ति आंदोलन, सूफी आंदोलन, और मुगल अलाबेंज, अकबर की सुलह-ए-कुल की नीति का व्यापक अध्ययन किया गया है। विश्लेषणात्मक पद्धति अपनाते हुए यह शोध ऐतिहासिक पुरातत्वों, समकालीन अभिलेखों और विद्वानों के शोध कार्यकलापों पर आधारित है। अवशेष हैं कि मध्यकालीन भारत में धार्मिक सहिष्णुता केवल एक राजनीतिक रणनीति नहीं थी, बल्कि यह सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का सिद्धांत था। भक्ति और सूफी संतों ने जाति और धर्म की सीमाओं को पार करते हुए हितकारी संदेश दिया। मुगल शासकों, अलैह अकबर ने विधानसभा के माध्यम से धार्मिक समन्वय को बढ़ावा दिया। इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि मध्यकालीन भारत की बहुलतावादी परंपरा आधुनिक भारत की पुस्तकालय व्यवस्था की स्थापना रही है।


