प्रेमचंद के कथा-साहित्य में ग्रामीण जीवन और सामाजिक परिवर्तन की अभिव्यक्ति

Authors

  • के एम तरुणा देवी शोधार्थी, हिंदी विभाग, महाकौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्य प्रदेश, भारत Author
  • डॉ. श्वेता गर्ग सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, महाकौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्य प्रदेश, भारत Author

Keywords:

प्रेमचंद, ग्रामीण साहित्य, सामाजिक परिवर्तन, भारतीय समाज, कथा विश्लेषण, अनुभवजन्य अध्ययन, सामाजिक यथार्थवाद।

Abstract

प्रेमचंद हिंदी साहित्य के अग्रदूत हैं जिन्होंने ग्रामीण भारत के सामाजिक यथार्थ को अपने कथा-साहित्य में गहन संवेदनशीलता के साथ चित्रित किया। प्रस्तुत अनुभवजन्य अध्ययन प्रेमचंद की प्रमुख कहानियों—गोदान, कफन, पूस की रात, ईदगाह, बड़े भैया और ठाकुर का कुआं—में ग्रामीण जीवन की विविध समस्याओं और सामाजिक परिवर्तन के आयामों का विश्लेषण करता है। डेटा-संचालित पद्धति अपनाते हुए, हमने 150 पाठ्य खंडों में सामाजिक मुद्दों की पुनरावृत्ति दर, पात्रों के वर्गीकरण, और ग्रामीण-शहरी संघर्ष के विषयों की गणना की। परिणाम दर्शाते हैं कि प्रेमचंद की कृतियों में दहेज प्रथा (28%), भूमि असमानता (23%), शिक्षा की कमी (19%), और आर्थिक शोषण (18%) जैसे मुद्दे केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। अध्ययन निष्कर्ष निकालता है कि प्रेमचंद का साहित्य न केवल सामाजिक दस्तावेज के रूप में कार्य करता है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के लिए एक समालोचनात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह शोध प्रेमचंद की कृतियों की स्तरीय पढ़ाई के माध्यम से आधुनिक भारत के सामाजिक इतिहास को पुनर्परिभाषित करने का प्रयास है।

Downloads

Published

2026-01-29

Issue

Section

Articles

How to Cite

प्रेमचंद के कथा-साहित्य में ग्रामीण जीवन और सामाजिक परिवर्तन की अभिव्यक्ति. (2026). Global Journal of Sociology and Anthropology, 15(1), 1-10. https://ijpp.org/journal/index.php/GJSA/article/view/599