मल्टीमीडिया उपयोग और किशोरों के सामाजिक समायोजन एवं आक्रामक व्यवहार के मध्य संबंध: एक अध्ययन

Authors

  • मनीषा शुक्ला शोधार्थी, मनोविज्ञान विभाग, भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग, छत्तीसगढ़ Author
  • डॉ. चंद्र दीप प्रसाद पर्यवेक्षक, मनोविज्ञान विभाग, भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग, छत्तीसगढ़ Author

Keywords:

मल्टीमीडिया, किशोरावस्था, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समायोजन, आक्रामक व्यवहार, स्क्रीन-टाइम, सोशल मीडिया

Abstract

वर्तमान डिजिटल युग में मल्टीमीडिया किशोरों के जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, वीडियो गेम्स और इंटरनेट प्लेटफॉर्म की उपलब्धता ने किशोरावस्था के मनोसामाजिक विकास को गहराई से प्रभावित किया है। यह समीक्षा शोधपत्र पिछले दो दशकों के मुख्य अध्ययनों का मेटा-विश्लेषणात्मक अवलोकन प्रस्तुत करता है, जिसमें मल्टीमीडिया एक्सपोजर और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समायोजन तथा आक्रामक व्यवहार के बीच के अंतर्संबंधों की पड़ताल की गई है। साहित्य से स्पष्ट होता है कि अत्यधिक स्क्रीन-टाइम, उदासीनता और नींद संबंधी विकारों से जुड़ा पाया गया है, जबकि हिंसक कंटेंट का बार-बार संपर्क आक्रामकता की प्रवृत्तियों को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही, कुछ अध्ययन यह भी बताते हैं कि संतुलित एवं शैक्षणिक मल्टीमीडिया उपयोग सामाजिक कौशल तथा संज्ञानात्मक विकास में सहायक सिद्ध होते हैं। इस विरोधाभास को समझने के लिए अध्ययन पद्धतियों, नमूना आकार, सांस्कृतिक संदर्भ और मापन उपकरणों में भिन्नता को ध्यान में रखा गया है। पेपर में पिछले शोधों की पद्धतिगत सीमाओं की आलोचनात्मक समीक्षा की गई है, जिसमें अनुदैर्ध्य अध्ययन की कमी, आत्म-रिपोर्ट डेटा पर अत्यधिक निर्भरता और सांस्कृतिक विविधता की उपेक्षा प्रमुख रूप से उभर कर सामने आती हैं। निष्कर्षतः, यह समीक्षा भविष्य के शोध हेतु एक संतुलित ढांचा प्रस्तुत करती है जो मल्टीमीडिया के प्रभावों को समझने और उचित नीति निर्माण में सहायक होगा।

Downloads

Published

2025-12-23

Issue

Section

Articles

How to Cite

मल्टीमीडिया उपयोग और किशोरों के सामाजिक समायोजन एवं आक्रामक व्यवहार के मध्य संबंध: एक अध्ययन. (2025). Global Journal of Sociology and Anthropology, 14(1), 01-07. https://ijpp.org/journal/index.php/GJSA/article/view/600