स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का अध्ययन: ग्वालियर जिले के संदर्भ में
Keywords:
स्वयं सहायता समूह; महिला सशक्तिकरण; सूक्ष्म वित्त; ग्वालियर जिला; आर्थिक सशक्तिकरण; सामाजिक सशक्तिकरण; ग्रामीण आजीविकाAbstract
भारत में महिला सशक्तिकरण एक बहुआयामी प्रक्रिया है जिसमें आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं मनोवैज्ञानिक कारक आपस में गहराई से जुड़े होते हैं। स्वयं सहायता समूह ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं को संगठित करने, बचत की आदत विकसित करने तथा ऋण और उद्यमिता का लाभ उठाने हेतु आर्थिक अवसर प्रदान करते हैं। प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य ग्वालियर जिले के विशेष संदर्भ में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका का विश्लेषण करते हुए विगत दो दशकों में इस दिशा पर हुए शोधों तथा स्वयं सहायता समूहों के प्रभाव पर किए गए अध्ययनों की समीक्षा करना है। इस अध्ययन में विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों से संबंधित सरकारी प्रतिवेदनों, नाबार्ड तथा दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के आंकड़ों एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रों का दस्तावेजी पुनरावलोकन किया गया है। अध्ययन में यह स्पष्ट होता है कि स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं की आय, ऋण, निर्णय लेने की क्षमता, सामाजिक गतिशीलता तथा आत्मनिर्भरता में उल्लेखनीय सुधार किया है, परंतु अभी भी अपर्याप्त बैंकिंग, अपर्याप्त बाजार संपर्क, वित्तीय साक्षरता की कमी तथा सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाएँ जैसी अनेक चुनौतियाँ सामने आई हैं। ग्वालियर जिले के संदर्भ में उपलब्ध सीमित अध्ययनों में पाया गया है कि इस क्षेत्र में भी आर्थिक एवं आजीविका संबंधी उपलब्धियों के बावजूद महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए आगे और अधिक शोध की आवश्यकता है। यह समीक्षा पत्र नीति निर्माताओं, गैर-सरकारी संगठनों, बैंकिंग संस्थाओं तथा शोधकर्ताओं के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा एवं स्वयं सहायता समूह आधारित कार्यक्रमों को भविष्य में अधिक प्रभावी, संवहनीय एवं समावेशी बनाने हेतु ठोस दिशा प्रदान करता है।


